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UP School Electricity: 9 माह पहले 20 करोड़ आवंटित, बिजली विभाग के उदासीनता से स्कूल अंधेरे में, हाईकोर्ट भी नाराज!

CollegeDekho Editorial Team
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UP School Electricity

लखनऊ / प्रयागराज / कानपुर: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का जो सपना सरकार ने देखा था, वह बिजली विभाग की अक्षमता और आपसी समन्वय की कमी के कारण अधूरा रह गया है। करीब नौ माह पहले बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के हजारों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बिजली कनेक्शन सुनिश्चित करने के लिए बिजली निगम को 20 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि हस्तांतरित की थी, लेकिन आज तक सैकड़ों स्कूल अंधेरे में हैं।

इस मामले ने अब विधान परिषद की समिति का ध्यान खींचा है। प्रयागराज में हुई बैठक में समिति के सदस्यों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आखिर पैसे होने के बाद भी स्कूलों में बिजली क्यों नहीं पहुंच पाई, इसका असर छात्रों पर क्या पड़ रहा है, और आखिर कब तक इस समस्या का समाधान होगा।

ताजा अपडेट और खबर

  • 20 करोड़ फंड जारी, लेकिन काम अधर में: बेसिक शिक्षा विभाग ने बिजली कनेक्शन के लिए 20 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, लेकिन कनेक्शन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
  • विधान परिषद ने लगाई फटकार: प्रयागराज में मंगलवार को हुई बैठक में विधान परिषद की समिति के सामने यह मामला आया तो सभापति ने नाराजगी जताई और दोनों विभागों (शिक्षा और बिजली) के बीच समन्वय बनाने के निर्देश दिए।
  • अब भी सैकड़ों स्कूल पीछे: बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्टीमेट जमा कर दिए गए हैं, लेकिन बिजली विभाग ने अब तक बड़ी संख्या में स्कूलों में कनेक्शन नहीं दिए हैं।
  • प्रयागराज से लेकर प्रतापगढ़ तक समस्या: समिति की बैठक में प्रयागराज और प्रतापगढ़ दोनों जिलों के अधिकारी शामिल हुए, यानी यह समस्या सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है।

उत्तर प्रदेश में मौजूदा स्थिति

प्रदेश में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर से लेकर बरेली और मेरठ जैसे जिलों में स्थिति लगभग एक जैसी है। शिक्षा विभाग का कहना है कि उन्होंने अपना काम कर दिया और बिजली कनेक्शन के लिए एस्टीमेट (अनुमानित लागत) बिजली विभाग को भेज दी थी। लेकिन बिजली विभाग ने आपसी तालमेल न बनने के कारण काम को आगे नहीं बढ़ाया।

विधान परिषद की समिति के सामने जब यह मामला आया तो सदस्यों ने साफ कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समिति के निर्देश हैं कि दोनों विभाग आपस में बात करके जल्द से जल्द काम पूरा करें।

Class 10–12 के छात्रों के लिए जरूरी जानकारी

यदि आप कक्षा 10वीं या 12वीं के छात्र हैं, तो यह मामला सीधे आपसे जुड़ा है। बिना बिजली के स्कूलों में पढ़ाई का माहौल खराब हो जाता है।

  • पढ़ाई में बाधा: गर्मियों में बिना पंखे के क्लास में बैठना मुश्किल हो जाता है। कंप्यूटर लैब या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलाना भी संभव नहीं हो पाता।
  • समय की बर्बादी: शिक्षक और छात्र बिजली न होने की वजह से काफी समय बर्बाद करते हैं।
  • सुरक्षा के लिए खतरा: अंधेरे में स्कूल परिसर असुरक्षित हो जाता है, खासकर लड़कियों के लिए।

College और University Students के लिए जरूरी जानकारी

हालांकि यह समस्या मुख्य रूप से बेसिक शिक्षा (प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों) से जुड़ी है, लेकिन यह हमारे शिक्षा तंत्र की बड़ी खामी को दर्शाती है। यदि नींव ही कमजोर होगी तो उच्च शिक्षा मजबूत नहीं हो सकती। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों को इस मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए और सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उजागर करना चाहिए।

Eligibility और Admission Process

यह खबर किसी परीक्षा या दाखिले से जुड़ी नहीं है, लेकिन यह शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी कमजोरी को दर्शाती है। जब तक स्कूलों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा नहीं होगी, तब तक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना मुश्किल है। यह सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ अन्याय है।

प्रभावित जिले और मुख्य समस्याएं

जिलास्थितिप्रमुख समस्या
प्रयागराजबेहद खराबस्टीमेट जमा, लेकिन कनेक्शन नहीं
प्रतापगढ़बेहद खराबसमिति के समक्ष मामला पहुंचा
लखनऊखराबकई स्कूल अंधेरे में
कानपुरखराबबिजली कनेक्शन में देरी
बरेली / मेरठ / गाजियाबादखराबदोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी

Important Dates (मामले से जुड़ी तारीखें)

  • धनराशि जारी होने का समय: लगभग 9 माह पहले (2025 के मध्य में)
  • विधान परिषद की समिति की बैठक: 3 जून 2025
  • समिति द्वारा सख्त निर्देश: 3 जून 2025 को
  • काम पूरा करने की समय सीमा: अभी तय नहीं

Students की आम गलतियां

इस मामले में छात्रों की कोई गलती नहीं है। गलती प्रशासनिक तंत्र की है। लेकिन अक्सर छात्र और अभिभावक ऐसे मुद्दों पर चुप रहते हैं, जो एक बड़ी गलती है। अगर आपके स्कूल में बिजली नहीं है, तो:

  1. चुप न रहें: इसकी शिकायत अपने टीचर, प्रिंसिपल और फिर जिला अधिकारी से करें।
  2. सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें: ट्विटर (X) पर CM Helpline या अपने जिले के DM को टैग करें।
  3. आवाज उठाने से डरें नहीं: आपकी आवाज ही बदलाव ला सकती है।

Parents को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

एक अभिभावक होने के नाते, आप अपने बच्चे की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।

  • स्कूल जाकर जांच करें: एक बार स्कूल जाकर देखें कि बिजली की स्थिति क्या है।
  • PTA (Parent-Teacher Association) में उठाएं मुद्दा: PTA की बैठकों में इस मुद्दे को सख्ती से उठाएं।
  • प्रशासन से शिकायत करें: अगर स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होती है, तो जिला प्रशासन या बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से शिकायत करें।
  • जागरूकता फैलाएं: अन्य अभिभावकों को भी इस मुद्दे पर जागरूक करें ताकि सामूहिक आवाज उठाई जा सके।

Career Scope और Future Opportunities

बिजली की कमी का सीधा असर करियर पर पड़ता है।

  • डिजिटल एजुकेशन पर असर: सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, लेकिन बिना बिजली के स्मार्ट क्लास या कंप्यूटर एजुकेशन संभव नहीं है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र पीछे रह जाते हैं।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी: NEET, JEE, UPSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर अध्ययन सामग्री और माहौल चाहिए। अंधेरे स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र शहरी छात्रों से कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे?
  • गरीबी का चक्र: शिक्षा ही गरीबी से निकलने का सबसे बड़ा रास्ता है। अगर सरकारी स्कूलों की हालत यह है, तो गरीब छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

Students के अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: 20 करोड़ रुपये कब जारी किए गए थे?
जवाब: यह धनराशि करीब 9 माह पहले जारी की गई थी।

सवाल: अब तक काम क्यों नहीं हुआ?
जवाब: शिक्षा विभाग और बिजली विभाग के बीच आपसी समन्वय की कमी के कारण काम अटका हुआ है। शिक्षा विभाग का कहना है कि उन्होंने स्टीमेट दे दिया, जबकि बिजली विभाग ने कनेक्शन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई।

सवाल: विधान परिषद ने इस मामले में क्या कहा?
जवाब: विधान परिषद की समिति ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोनों विभागों को आपस में बात करके जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

सवाल: क्या यह समस्या सिर्फ प्रयागराज में है?
जवाब: नहीं, यह समस्या प्रयागराज, प्रतापगढ़ समेत प्रदेश के कई जिलों में है।

सवाल: हम अपने स्कूल में बिजली कनेक्शन के लिए कहां शिकायत करें?
जवाब: सबसे पहले स्कूल प्रिंसिपल से बात करें। अगर वहां कोई हल नहीं होता है, तो बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) या जिलाधिकारी (DM) से शिकायत करें। आप CM Helpline (1905) पर भी फोन कर सकते हैं।

अन्य उपयोगी जानकारी और संबंधित लेख

अगर आप उत्तर प्रदेश में शिक्षा से जुड़ी अन्य जानकारी ढूंढ रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार होंगे:

External Official Links

Important Official Links

PurposeOfficial Link
UP Basic Education Departmenthttps://upbasiceducation.org
UP Power Corporation Ltd. (UPPCL)https://www.uppcl.org
CM Helpline (Jansunwai)https://jansunwai.up.nic.in
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