
वाराणसी / लखनऊ / प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के शिक्षा मॉडल (Yogi Model of Education) ने अब पूरे देश में एक नई पहचान बना ली है। वाराणसी में हाल ही में आयोजित उत्तर प्रदेश शिक्षा संकल्प कॉन्क्लेव 2026 (Uttar Pradesh Shiksha Sankalp Conclave 2026) में इस मॉडल को पूरे देश के लिए एक सफल ब्लूप्रिंट के तौर पर पेश किया गया। कॉन्क्लेव में देशभर से आए शिक्षा विशेषज्ञों, आयोगों और राज्यों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के शिक्षा सुधारों की सराहना की और उन्हें अपनाने की बात कही।
इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि ‘योगी मॉडल’ क्या है, कॉन्क्लेव में क्या-क्या बातें हुईं, प्रदेश के स्कूलों में कैसे बदलाव आया, और इसका सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर क्या पड़ेगा। यह जानकारी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, बरेली, मेरठ, मुरादाबाद और गाजियाबाद समेत पूरे प्रदेश के छात्रों और अभिभावकों के लिए बेहद जरूरी है।
ताजा अपडेट और खबर
- शिक्षा संकल्प कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन: वाराणसी में दो दिवसीय (3-4 अप्रैल 2026) कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया।
- NITI आयोग और केंद्रीय शिक्षा मंत्री शामिल हुए: कॉन्क्लेव में NITI आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और UP के सीएम योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे।
- 17 राज्यों ने माना UP का मॉडल बेहतर: असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत देश के 17 राज्यों ने यूपी के शिक्षा सुधारों को सबसे कारगर बताया।
- यूपी सरकार कराएगी ट्रेनिंग: अब ये राज्य यूपी के शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों से ट्रेनिंग लेंगे।
- अब स्कूल बंद नहीं होंगे: CM योगी ने कहा कि पहले स्कूल बंद होने के बाद बच्चे मजदूरी करने लगते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
- ऑपरेशन कायाकल्प: 1.36 लाख से अधिक स्कूलों का कायाकल्प हुआ है।
उत्तर प्रदेश में मौजूदा स्थिति
उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में जो बदलाव किए हैं, उसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। ‘ऑपरेशन कायाकल्प (Operation Kayakalp)’, ‘निपुण भारत मिशन’ और ‘स्कूल चलो अभियान’ जैसी योजनाओं ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है। 1.36 लाख से अधिक स्कूलों में बिजली, पानी, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और खेल के मैदान जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।
शिक्षा संकल्प कॉन्क्लेव में CM योगी ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब थी। बच्चे स्कूलों से दूर भागते थे और छुट्टियों के बाद 40% बच्चे स्कूल नहीं लौटते थे। लेकिन अब सरकारी स्कूलों में इतनी सुविधाएं हो गई हैं कि प्राइवेट स्कूलों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में आना चाहते हैं।
क्या है ‘योगी मॉडल’ (Yogi Model of Education)?
योगी मॉडल को समझने के लिए हमें पिछले 8 सालों में हुए बदलावों को देखना होगा। यह मॉडल चार स्तंभों पर खड़ा है:
- बुनियादी ढांचे का सुधार (Infrastructure): ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत स्कूलों को स्मार्ट क्लास, लैब, लाइब्रेरी, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं दी गईं।
- डिजिटल एजुकेशन: कोविड के समय शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई को नियमित किया गया। अब सरकारी स्कूलों में भी डिजिटल क्लास चल रही हैं।
- शिक्षकों का प्रशिक्षण (Teacher Training): SCERT और DIET के माध्यम से शिक्षकों को नियमित ट्रेनिंग दी जा रही है।
- पाठ्यक्रम में बदलाव (Curriculum): यूपी बोर्ड ने NCERT आधारित पाठ्यक्रम को अपनाया है, जिससे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार हो रहे हैं।
योगी मॉडल के प्रमुख बदलाव: 2017 बनाम 2026
| प्रमुख संकेतक | 2017 से पहले | 2026 में |
|---|---|---|
| स्कूलों में शौचालय | कमी | सभी स्कूलों में |
| बिजली कनेक्शन | लगभग 60% स्कूल | 99% से अधिक स्कूल |
| स्मार्ट क्लास की संख्या | <1000 | 62,500+ |
| ड्रॉपआउट रेट (उच्च प्राथमिक) | ~12% | ~5.3% |
| Purpose | Official Link |
|---|---|
| UP Basic Education Department | https://basic.up.gov.in |
| UP Board (UPMSP) | https://upmsp.edu.in |
| SCERT UP | https://scert.up.gov.in |
उत्तर प्रदेश का ‘योगी मॉडल’ अब पूरे देश के लिए शिक्षा सुधारों का एक मजबूत आधार बन चुका है। जहां एक तरफ प्रदेश ने 1.36 लाख से अधिक स्कूलों का कायाकल्प किया, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल एजुकेशन, शिक्षक प्रशिक्षण और NCERT पाठ्यक्रम ने शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयां दी हैं। शिक्षा संकल्प कॉन्क्लेव 2026 ने साबित कर दिया कि यूपी ने अब शिक्षा के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करना शुरू कर दिया है। छात्रों और अभिभावकों को इस बदलाव को समझना चाहिए और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।