
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का आगाज कर दिया है. इस मौके पर उन्होंने पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा और कहा कि 2017 से पहले शिक्षा सरकार की प्राथमिकता नहीं थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने परीक्षाओं में नकल को बढ़ावा दिया और स्कूलों की हालत दयनीय थी.
चाहे आप लखनऊ से हों, कानपुर से, मुरादाबाद से या प्रयागराज से—यह अभियान हर जिले के उन बच्चों के लिए है जो किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुके हैं या जिनका दाखिला नहीं हो पाया है। इस आर्टिकल में जानिए पूरी डिटेल्स—क्या है स्कूल चलो अभियान, कब से शुरू हुआ, ड्रॉपआउट दर कितनी घटी, और सरकार क्या-क्या सुविधाएं दे रही है।
ताजा अपडेट और खबर
स्कूल चलो अभियान 2026-27 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 15 अप्रैल 2026 तक चलेगा. दूसरा चरण 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 के बीच चलेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अप्रैल 2026 को वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट स्कूल में इस अभियान का विधिवत शुभारंभ किया. इस मौके पर उन्होंने बच्चों के साथ मिड-डे मील भी खाया और किताबें वितरित कीं.
बड़ी खबर: योगी सरकार ने शिक्षा पर 80,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा है. प्रदेश में ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर अब सिर्फ 3 प्रतिशत रह गई है. सरकार का लक्ष्य इस बार ड्रॉपआउट दर को शून्य तक लाने का है.
उत्तर प्रदेश में शिक्षा की मौजूदा स्थिति
प्रदेश में 1.36 लाख से अधिक स्कूलों में बुनियादी ढांचा बेहतर हुआ है। सरकारी स्कूलों में अब लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था है. योगी सरकार के कार्यकाल में अब तक लगभग 60 लाख नए छात्रों का नामांकन हुआ है.
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में करीब 1,50,660 बच्चे ड्रॉपआउट श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं. इन सभी को वापस स्कूल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘ऑपरेशन निपुण’ जैसी योजनाओं से स्कूलों की स्थिति में सुधार आया है, जिसे NITI Aayog ने सराहा भी है.
Class 10–12 के छात्रों के लिए जरूरी जानकारी
अगर आप किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुके हैं या 10वीं-12वीं की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी, तो यह अभियान आपके लिए है। सरकार अब घर-घर जाकर ऐसे बच्चों की पहचान करेगी.
- नामांकन प्रक्रिया: शिक्षक आपके घर आएंगे और सर्वे करेंगे। शारदा ऐप के जरिए ड्रॉपआउट बच्चों की सूची तैयार की जा रही है.
- बिना दस्तावेज भी एडमिशन: अगर आपके पास जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड जैसे दस्तावेज नहीं हैं, तब भी एडमिशन होगा. बाद में दस्तावेज पूरे कराए जाएंगे।
- बस्तियों पर विशेष फोकस: सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रवासी मजदूरों की बस्तियों, निर्माण श्रमिकों के आवासों और वंचित समुदायों में रहने वाले बच्चों का विशेष रूप से नामांकन सुनिश्चित किया जाए.
College और University Students के लिए जरूरी जानकारी
हालांकि यह अभियान मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा पर केंद्रित है, लेकिन कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों को भी इससे सीख लेने की जरूरत है।
- समाजसेवा का अवसर: आप अपने आसपास के गांवों और मोहल्लों में जाकर बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
- ट्यूशन और मेंटरशिप: आप ड्रॉपआउट बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों की मदद कर सकते हैं। इससे आपके सीवी में भी अच्छा जुड़ेगा।
- जागरूकता फैलाएं: सोशल मीडिया और अपने कॉलेज में इस अभियान के बारे में जागरूकता फैलाएं।
School Chalo Abhiyan 2026: Eligibility और Admission Process
इस अभियान के तहत 6 से 14 साल के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा से जोड़ने पर जोर है. नीचे दी गई टेबल से आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अभियान का नाम} | स्कूल चलो अभियान 2026-27 |
| लक्षित आयु वर्ग | 6 से 14 वर्ष (अनिवार्य शिक्षा) |
| अभियान के चरण | पहला चरण: 1-15 अप्रैल 2026, दूसरा चरण: 1-15 जुलाई 2026 |
| नामांकन प्रक्रिया | शिक्षक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे, शारदा ऐप से ड्रॉपआउट की पहचान |
| बिना दस्तावेज वाले बच्चे | दस्तावेज न होने पर भी एडमिशन, बाद में पूरे कराए जाएंगे |
Important Dates: School Chalo Abhiyan 2026-27
डेट्स पर नजर रखना बहुत जरूरी है। अगर आपके आसपास कोई बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है, तो उसे समय पर एडमिशन दिलवाएं:
- पहले चरण की शुरुआत: 1 अप्रैल 2026
- पहले चरण का समापन: 15 अप्रैल 2026
- दूसरे चरण की शुरुआत: 1 जुलाई 2026
- दूसरे चरण का समापन: 15 जुलाई 2026
- डीबीटी से यूनिफॉर्म के लिए राशि जारी: 15 अप्रैल और 15 जुलाई को दो किस्तों में
Students की आम गलतियां
फील्ड में काम करते हुए मैंने देखा है कि अभिभावक और छात्र कुछ गलतियाँ बार-बार दोहराते हैं। इनसे बचें:
- “प्राइवेट स्कूल ही बेहतर है” का भ्रम: योगी सरकार ने सरकारी स्कूलों की हालत सुधार दी है। अब सरकारी स्कूलों में भी बेहतर सुविधाएं और शिक्षा मिल रही है.
- दस्तावेज न होने पर एडमिशन न लेना: सरकार ने साफ कह दिया है कि बिना दस्तावेज के भी एडमिशन होगा. अगर आपके पास दस्तावेज नहीं हैं, तब भी बच्चे का एडमिशन कराएं।
- अभियान की जानकारी न होना: कई अभिभावकों को इस अभियान के बारे में पता ही नहीं होता। अपने आसपास के लोगों को इसके बारे में बताएं।
- बच्चों से पढ़ाई के प्रति अनिच्छा: कई बार बच्चे खुद स्कूल नहीं जाना चाहते। ऐसे में उन्हें समझाएं कि शिक्षा उनके भविष्य के लिए कितनी जरूरी है।
Parents को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
पैरेंट्स के तौर पर आप चाहते हैं कि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे। यहाँ कुछ जरूरी सुझाव:
- बच्चे को स्कूल जरूर भेजें: सरकार हर बच्चे को मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें, बैग, जूते-मोजे और स्वेटर दे रही है. डीबीटी के जरिए हर बच्चे को ₹1200 यूनिफॉर्म के लिए दिए जा रहे हैं.
- शिक्षकों के घर आने पर सहयोग करें: शिक्षक सर्वे के लिए घर-घर जाएंगे. उनकी मदद करें और बच्चे का नामांकन जरूर कराएं।
- सरकारी स्कूलों पर भरोसा करें: मुख्यमंत्री ने खुद कहा है कि अब सरकारी स्कूल किसी भी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं हैं. चित्रकूट के DM ने अपनी बेटी का एडमिशन सरकारी स्कूल में करवाया, यह एक मिसाल है.
- बच्चे के स्वास्थ्य का ध्यान रखें: सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील दिया जाता है, जिससे बच्चे का पोषण भी सही रहता है.
यूपी के स्कूलों के बारे में और जानकारी के लिए यूपी के टॉप कॉलेज लिस्ट और स्कॉलरशिप योजनाओं की जानकारी जरूर पढ़ें।
Career Scope और Future Opportunities
शिक्षा ही वह माध्यम है जो बच्चे के भविष्य को संवारता है। मुख्यमंत्री योगी ने खुद कहा है कि “शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने का एक सशक्त हथियार है”.
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद बच्चों के लिए करियर के अनेक अवसर खुलते हैं। वे आगे चलकर पुलिस, सेना, शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और कई अन्य क्षेत्रों में जा सकते हैं। योगी सरकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को अब 12वीं तक बढ़ा रही है, ताकि बेटियों की पढ़ाई बीच में न रुके.
अगर आप आगे की पढ़ाई के बारे में सोच रहे हैं, तो यूपी के इंजीनियरिंग कॉलेज और बेस्ट MBA कॉलेज की लिस्ट जरूर देखें।
Students के अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: स्कूल चलो अभियान क्या है?
जवाब: यह यूपी सरकार का एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य 6 से 14 साल के ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल से जोड़ना है.
सवाल: इस अभियान के तहत सरकार बच्चों को क्या-क्या सुविधाएं दे रही है?
जवाब: सरकार मुफ्त यूनिफॉर्म (दो सेट), किताबें, बैग, जूते-मोजे, स्वेटर, और मिड-डे मील दे रही है। यूनिफॉर्म के लिए ₹1200 की राशि डीबीटी से दी जाती है.
सवाल: क्या बिना दस्तावेज वाले बच्चे का भी एडमिशन होगा?
जवाब: हाँ, सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दस्तावेज न होने पर भी एडमिशन किया जाएगा.
सवाल: ड्रॉपआउट दर कितनी घटी है?
जवाब: 2017 से पहले ड्रॉपआउट दर 19% थी, जो अब घटकर 3% रह गई है.
सवाल: शिक्षकों को कितना मानदेय मिलेगा?
जवाब: सरकार ने अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर ₹17,000 और शिक्षा मित्रों के लिए ₹18,000 प्रति माह कर दिया है.
सवाल: मैं बरेली या मुरादाबाद से हूँ, क्या मेरे यहाँ भी यह अभियान चलेगा?
जवाब: हाँ, यह अभियान पूरे उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा है। हर जिले में शिक्षक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे.
निष्कर्ष: ड्रॉपआउट दर शून्य करने का संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि प्रदेश में ड्रॉपआउट दर को शून्य पर लाना है. ‘स्कूल चलो अभियान’ इस दिशा में एक बड़ा कदम है। 1.5 लाख से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.
अगर आपके आसपास कोई बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है, तो उसे समझाएं और उसका एडमिशन करवाएं। सरकार ने शिक्षा को मुफ्त और अनिवार्य बना दिया है। सरकारी स्कूलों में अब बेहतर सुविधाएं हैं, और बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मुफ्त भोजन और किताबें भी मिल रही हैं।
अपने शहर—लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद—में अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है, तो उसे जरूर स्कूल भेजें। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा जरिया है जो बच्चे का भविष्य उज्ज्वल बना सकता है।
Important Official Links
स्कूल चलो अभियान से जुड़ी कोई भी जानकारी लेने के लिए हमेशा ऑफिशियल सोर्सेज का ही उपयोग करें। यहाँ जरूरी लिंक दिए जा रहे हैं:
| Purpose | Official Link |
|---|---|
| Uttar Pradesh Basic Education Department Official Website | https://basiceducation.up.gov.in/ |
| UP Government Official Portal | https://up.gov.in/ |
| NIPUN Bharat Mission | https://nipun.bihar.gov.in/ |
| Ministry of Education, Government of India | https://www.education.gov.in/ |
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